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भिवंडी शहर की एक लड़की हालत से लढकर बनी CA | Inspirational Story of Insha Tufail Ansari

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भिवंडी जैसे एक छोटे से शहर में रहकर सीए चार्टर्ड अकाउंटेंट का एग्जाम क्लियर किया है। हिजाब में रहकर इतनी बड़ी अचीवमेंट ये अपने आप में एक बहुत बड़ा हम कहेंगे अचीवमेंट है।

यह दुख, यह दर्द, यह सब तेरे अंदर है। तू अपने बनाए हुए पिंजरे से बाहर निकल कर देख। तू अपने आप में एक सिकंदर है।

कि अल्लाह की रज़ रजा के आगे बिल्कुल राजी अल्लाह की रजा के साथ में राजी ये सभी लड़कियों के लिए एक बहुत मोटिवेटेड लाइन है। क्यों? क्योंकि लड़कियां अक्सर जो है शिकायतें करने लग जाती है।

अपने घर में पढ़ा पढ़ना और फिर शादी करके जाना और तुमको वही इमीडिएटली जो है पढ़ाई को कंटिन्यू करना था। तो पूरा जैसे कि ऊपर नीचे हो जाता है। मतलब जैसे कि पूरी दुनिया बदली हो जाती है ना? बदल जाती है पूरी।

जी बिल्कुल।

तो फिर वहां पे जैसे यहां पे मां का लाड था। अब यहां पे सास के ताने हो गए। तो उसमें कैसे तुमने जो है उसको कोप अप किया। कैसे मतलब फिर ये सब चीजें आई थी क्या यहां पर भी।

आप अमिताभ बच्चन के घर में पैदा हो सकते हैं लेकिन अमिताभ बच्चन बनने के लिए आपको कीमत देनी होगी।

क्या बात है दोस्तों तो अब हमें पता चला कि इंशा के इतने सारे अटेम्प्ट क्यों हुए? क्योंकि आधे से आधे से ज्यादा ध्यान तो उनका शायरी याद करने में [हंसी] जाता था।

तो ये बताओ कि जैसे जो स्ट्रगलिंग फेस था जैसे तुमने देखा तुम्हारी इंगेजमेंट टूट गई थी। बार-बार अटेम्प्ट क्लियर नहीं होना तो लोगों की बातें लोगों के ताने रहते थे। तो उससे कैसे तुमने डील किया। कैसे उसे ओवरकम किया।

तो मैं 8 मंथ्स प्रेग्नेंट थी।

ओह हो।

लेकिन फिर भी मैंने हार नहीं मानी। मैंने प्रिपेयर किया एग्जाम के लिए। बहुत ऊपर नीचे मेरी हेल्थ सिचुएशंस भी चल रही थी। बट डिस्पाइट एवरीथिंग मैंने सब कुछ फेस किया। मैंने पढ़ाई की।

हैप्पी शॉप। [संगीत] यह सिर्फ एक दुकान ही नहीं ठिकाना है खुशियों का। शॉप में एंटर करते ही बच्चों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है।
जो लोग इंपॉर्टेंट प्रोडक्ट्स के शौकीन हैं, उन्हें तो यह जगह जिसे जन्नत लगती है।

यहां के प्रोडक्ट क्वालिटी के तो क्या ही कहने। दुनिया भर के बेस्ट ब्रांड्स के प्रोडक्ट आपको यहां मिल जाएंगे।

आप भी अपनी फैमिली के साथ खुशियां बटोरने जरूर आइए। हैप्पी शो। [संगीत] एट सुप्रीम पेट्रोल पंप चाविंद्रा भिवंडी।

हेलो फ्रेंड्स, मैं फिरोज मेमन द में आप सभी का स्वागत है। हमारी सोसाइटी हमारी समाज में औरतों को लेकर काफी लोगों की अलग-अलग सोच अलग-अलग बातें हैं। लेकिन औरतें हर मुकाम पर हर कदम पर अपने आप को साबित कर रही है। अपने को प्रूव कर रही है।

भिवंडीज जैसे एक छोटे से शहर में अपने आपको हाइली एजुकेट करना ये अपने आप में एक बहुत बड़ी बात है। ये अपने आप में एक बहुत बड़ी मिसाल है।

तो ऐसी ही एक खातून, एक मोहतरमा, एक फीमेल, एक लेडीज आज हमारे स्टूडियो में मौजूद है। जिनका नाम है इंशा तफैल अंसारी।

इन्होंने भिवंडी जैसे एक छोटे से शहर में रहकर सीए चार्टर्ड अकाउंटेंट का एग्जाम क्लियर किया है। हिजाब में रहकर इतनी बड़ी अचीवमेंट ये अपने आप में एक बहुत बड़ा हम कहेंगे अचीवमेंट है।

तो ये आज हमारे साथ में हमारे स्टूडियो में है। तो इनकी जर्नी के बारे में, इनके सफर के बारे में, इनके अचीवमेंट के बारे में आज हम बात करेंगे।

तो इंशा बहुत-बहुत स्वागत है आपका हमारे चैनल में।

तो इंशा पहले ये बताइए कि आपने स्कूलिंग कैसे किया और स्कूलिंग के बाद में आपने कैसे किया कि मुझे सीए ही करना है। तो थोड़ा सा उसके बारे में थोड़ा सा बताइए।

स्कूलिंग मैंने डॉ. ओम प्रकाश अग्रवाल इंग्लिश हाई स्कूल से किया है। हम उसके बाद फिर मैंने जूनियर कॉलेज केमएस से किया हुआ है।

तो जब मैं वहां पर थी तो मुझे एक टीचर थी जो कि मुझे हमेशा से देख के बोला करती थी कि इंशा आई सी अ सीए इन यू।

अच्छा।

तो वहां से कहीं ना कहीं एक वो जो सीड होती है।

बीज डाला गया था।

हां वो एक आ गया था। और वहीं से मुझे ऐसा हुआ कि हां मुझे करना है। उस वक्त कुछ पता तो नहीं था कि कैसे करना है, कहां से स्टार्ट करना है, क्या स्टेजेस होते हैं, कुछ भी नहीं था।

लेकिन लकीली उस वक्त कुछ ऐसा हुआ कि ग्रांट आ गई गवर्नमेंट की तरफ से।

और जो फर्स्ट स्टेज होता है वो उसके लिए वो फ्री ऑफ कॉस्ट देने के लिए रेडी। जो फाउंडेशन कोर्स रहता है उसकी बात कर रहे उसके लिए।

और बस उनका एक ही क्राइटेरिया था कि आपको जो आईसीआई को रजिस्ट्रेशन फीस देनी होती है वो आप दे दो। बाकी कोचिंग हम आपको फ्री में दे देंगे।

अच्छा।

तो उस वक्त ऐसा था कि कोई यकीन करने के लिए तैयार भी नहीं था कि ये भिवंडी में रहकर कि ये क्या है। ये कैसे कर कैसे करेगी।

और तो और कुछ इतना ज्यादा था भी नहीं नॉलेज कि कैसे पर्स्यू करना है उस वक्त तो। लेकिन मुझे तो था कि मुझे तो करना ही है। तो मैंने जॉइन कर लिया।

पहले तो थोड़ा सेल्फ डाउट भी हो रहा था कि पता नहीं होगा कि नहीं होगा।

फिर बट मैंने कुछ दिन के लिए मैंने देखा बैठा समझा कि हां डएबल तो है कर सकते हैं। भले ही डिफिकल्ट है लेकिन करेंगे तो हो जाएगा।

तो वहां से मैंने स्टार्ट किया। भले ही मुझे नहीं पता था कि ये जो फाउंडेशन है इसके बाद क्या करना है।

अच्छा।

लेकिन, यह होना चाहिए इंसान के अंदर कि ठीक है जहां तक के रास्ता दिख रहा है, वहां तक के तो चलो।

बिलकुल एक स्टार्ट तो करो। मतलब जैसे इंग्लिश में बोलते हैं ना बिगिनिंग इज हाफ डन। [हंसी]

एक बार तुमने शुरुआत कर दी तो समझो आपका आधा काम हो गया।

हां।

फिर हम वहां पर जब पहुंचते हैं तो हमको आगे का रास्ता भी दिखने लगता है।

तो उस तरीके से फिर मैंने स्टार्ट किया वो जॉइन करके। फिर एक-एक रास्ते खुलते चले गए। पता चलते गया कहां से क्लासेस लेनी है, क्या करनी है।

एंड उस तरीके से फिर मैंने स्टार्ट किया।

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