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भिवंडी में जातिवाद नहीं चलता | दलित और पिछड़े लोगों का लीडर् | Mahendra Gaikwad
भिवंडी शहर की राजनीति, दलित समाज के मुद्दे, विकास की रुकावटें और महानगरपालिका की कार्यप्रणाली पर आरपीआई नेता व वरिष्ठ समाजसेवी महेंद्र गायकवाड़ ने द वॉइस न्यूज़ के साथ एक लंबे और बेबाक इंटरव्यू में खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर से लेकर आज के सिस्टम की खामियों तक हर मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की।
🗳️ 26 साल की उम्र में राजनीति की शुरुआत, ₹18,000 में चुनाव जीतने की कहानी
महेंद्र गायकवाड़ ने बताया कि उन्होंने वर्ष 1996 में मात्र 26 वर्ष की उम्र में पहला चुनाव लड़ा। उस समय जहां अन्य उम्मीदवारों ने 30–40 लाख रुपये खर्च किए, वहीं उन्होंने केवल ₹18,000 खर्च कर चुनाव जीता। उन्होंने कहा कि यह जीत पैसे से नहीं, बल्कि समाज के भरोसे से मिली थी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि समाज का साथ हो तो नेता टिकता है, वरना सिर्फ पद से कुछ नहीं होता।
✊ दलित पैंथर से राजनीतिक यात्रा की शुरुआत
उन्होंने बताया कि उनका राजनीतिक सफर भारतीय दलित पैंथर संगठन से शुरू हुआ। रामदास आठवले, प्रकाश आंबेडकर जैसे नेताओं के साथ मिलकर दलित समाज को एकजुट करने का प्रयास किया गया।
दलित बस्तियों में बिजली, पानी, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए उन्होंने ज़मीनी स्तर पर संघर्ष किया।
🏗️ वार्ड विकास बनाम पूरे शहर की राजनीति
महेंद्र गायकवाड़ ने कहा कि अगर किसी नेता को वार्ड मिलता है तो उसे ऐसा काम करना चाहिए कि वह रोल मॉडल बने।
उन्होंने अपने वार्ड में:
- मैदान का विकास
- सड़क निर्माण (बिना कमीशन)
- पानी की पाइपलाइन
- सार्वजनिक शौचालय
जैसे कार्यों का उल्लेख किया।
उनका कहना था कि कमीशन लेने से सड़कें बार-बार टूटती हैं, इसलिए उन्होंने क्वालिटी पर जोर दिया।
🏙️ भिवंडी के बिगड़ते हालात के लिए कौन जिम्मेदार?
उन्होंने साफ कहा कि भिवंडी की बदहाली के लिए सिर्फ सरकार नहीं, बल्कि शहर के लोग भी जिम्मेदार हैं।
कचरा सड़क पर फेंकना, सार्वजनिक जगहों को अपनी जिम्मेदारी न समझना और हर काम के लिए सिर्फ नगरपालिका को दोष देना—ये सभी आदतें शहर के विकास में बाधा हैं।
🏛️ महानगरपालिका और अधिकारियों पर गंभीर आरोप
महेंद्र गायकवाड़ ने भिवंडी महानगरपालिका पर गंभीर सवाल उठाए:
- अधिकारी वर्षों से एक ही कुर्सी पर जमे हुए हैं
- ठेकेदार और अफसरों की मिलीभगत
- अवैध निर्माण पर जानबूझकर कार्रवाई नहीं
- विकास कार्य केवल कागज़ों तक सीमित
उन्होंने मांग की कि जैसे पुलिस की बदली होती है, वैसे ही महानगरपालिका अधिकारियों का ट्रांसफर भी होना चाहिए।
🌊 वराल देवी तालाब की बदहाली पर चिंता
उन्होंने वराल देवी तालाब की दुर्दशा पर गहरी चिंता जताई।
कभी पीने योग्य पानी वाला यह तालाब आज:
- सीवेज से दूषित
- बिना सुरक्षा के
- आत्महत्या और अपराध का संभावित स्थान
बन चुका है।
उन्होंने तालाब के सौंदर्यीकरण, कंपाउंड व सुरक्षा की मांग की।
🏘️ तोड़क कार्रवाई पर संतुलित राय
हालिया तोड़क कार्रवाई पर उन्होंने कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन 20–30 साल से बसे गरीब लोगों को बिना पुनर्वास के बेघर करना गलत है।
पहले वैकल्पिक व्यवस्था, फिर कार्रवाई—यही सही तरीका होना चाहिए।
🗂️ आने वाले चुनाव और विज़न
अगर आगामी महानगरपालिका चुनाव में उनकी पार्टी को मौका मिलता है, तो उनका फोकस होगा:
- शिक्षा और स्वास्थ्य
- सामुदायिक हॉल
- सार्वजनिक सुविधाओं की बहाली
- दलित और वंचित बस्तियों का समग्र विकास
उन्होंने स्पष्ट किया कि वे खोखले वादे नहीं, बल्कि वही काम बताएंगे जो करके दिखा सकते हैं।