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भिवंडी में करोड़ों की 73 महानगरपालिका गाड़ियां कबाड़ में बदलीं, 66 वाहन अब भी ठेकेदार के कब्जे में
भिवंडी: भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका के करोड़ों रुपये के सरकारी वाहनों की देखरेख में कथित लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। कचरा संग्रह और उसे डंपिंग ग्राउंड तक पहुंचाने के लिए निजी ठेकेदार को दी गई 73 महानगरपालिका गाड़ियों की कुल कीमत करीब 9.19 करोड़ रुपये थी, लेकिन खराब रखरखाव और लगातार इस्तेमाल के कारण इनकी मौजूदा कीमत घटकर करीब 2.01 करोड़ रुपये रह गई है।
सबसे गंभीर बात यह है कि कचरा प्रबंधन का ठेका खत्म हुए ढाई साल से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन 73 में से अब तक केवल 7 गाड़ियां ही महानगरपालिका को वापस मिली हैं। बाकी 66 गाड़ियां अब भी वापस नहीं की गई हैं।
सिर्फ 1 रुपये किराए पर दी गई थीं गाड़ियां
महानगरपालिका ने 1 मई 2022 को आर एंड बी इंफ्रा को शहर से कचरा उठाने, डंपिंग ग्राउंड तक पहुंचाने और वैज्ञानिक तरीके से निपटाने का ठेका दिया था। इस दौरान 14वें वित्त आयोग के फंड से खरीदी गई 50 कचरा गाड़ियां और 23 आरसी गाड़ियां समेत अन्य सामान ठेकेदार को सौंपा गया था।
इन सरकारी वाहनों के इस्तेमाल के लिए ठेकेदार से महज 1 रुपये का मामूली किराया लिया जाना था। हालांकि, शहर में जगह-जगह कचरे के ढेर लगने और कचरा उठाने के काम में खराब प्रदर्शन की शिकायतों के बाद महानगरपालिका ने 13 फरवरी 2024 को ठेका समाप्त कर दिया।
नियमों के मुताबिक ठेका खत्म होने के बाद सभी वाहन और मशीनरी उसी स्थिति में महानगरपालिका को वापस करना जरूरी था, जिस स्थिति में उन्हें ठेकेदार को सौंपा गया था। लेकिन अब तक अधिकांश वाहन वापस नहीं मिल सके हैं और जो वाहन वापस मिले हैं, उनकी हालत भी खराब बताई जा रही है।
ठेकेदार से 7.83 करोड़ रुपये की वसूली बाकी
महानगरपालिका के अनुसार पूर्व कचरा ठेकेदार से करीब 7.83 करोड़ रुपये की राशि अभी भी वसूलना बाकी है। इस मामले ने महानगरपालिका के ठेका प्रबंधन, सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए महानगरपालिका आयुक्त अनमोल सागर ने वरिष्ठ अधिकारियों की एक समिति गठित की थी। समिति ने अपनी राय प्रशासन को सौंप दी है। अब वाहनों की वापसी, बकाया राशि की वसूली और ठेकेदार के साथ किसी संभावित समझौते को लेकर प्रस्ताव स्थायी समिति के सामने रखने पर विचार किया जा रहा है।
महानगरपालिका के उपआयुक्त (मुख्यालय) विक्रम दराडे ने भी बताया कि समिति की राय प्राप्त हो चुकी है और आगे की कार्रवाई के लिए प्रस्ताव स्थायी समिति के सामने रखने पर विचार किया जा रहा है।