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भिवंडी की राजनीति में बड़ी हलचल || NCP-SP और Samajwadi का गठबंधन टूट चुका है..

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भिवंडी में आगामी महापालिका चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज़ हैं, लेकिन इसी बीच एक बड़ी राजनीतिक तस्वीर साफ़ हो गई है। राष्ट्रीयवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन की संभावनाओं पर अब पूरी तरह विराम लग गया है।

एनसीपी (एसपी) भिवंडी शहर जिला अध्यक्ष शोएब गुड्डू खान पिछले कई महीनों से समाजवादी पार्टी के साथ चुनावी गठबंधन की कोशिशों में जुटे हुए थे। इसका मकसद यह था कि कांग्रेस से बगावत कर एनसीपी में आए उम्मीदवारों की जीत की संभावनाएं मजबूत की जा सकें। समाजवादी पार्टी के विधायक रईस शेख का क्षेत्र में मजबूत जनाधार देखते हुए यह गठबंधन एनसीपी के लिए अहम माना जा रहा था।

इसी क्रम में रईस शेख की कई सभाओं और उद्घाटन कार्यक्रमों में एनसीपी के नगर सेवकों की मौजूदगी भी देखी गई, जिससे गठबंधन की अटकलें और तेज़ हो गई थीं। हालांकि इन तमाम प्रयासों के बावजूद समाजवादी पार्टी के महाराष्ट्र अध्यक्ष अबू आसिम आज़मी ने एनसीपी (एसपी) से गठबंधन करने से साफ इनकार कर दिया।

खबरों के मुताबिक, अबू आसिम आज़मी को मनाने के लिए मुमरा के विधायक जितेंद्र आव्हाड और एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने भी प्रयास किए, लेकिन कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकला। इसके साथ ही एनसीपी (एसपी) के लिए गठबंधन की आखिरी उम्मीद भी खत्म हो गई।

अब सवाल यह है कि एनसीपी (एसपी) अकेले दम पर चुनावी मैदान में उतरेगी या फिर उसके उम्मीदवार किसी अन्य राजनीतिक विकल्प की तलाश करेंगे। वहीं दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के भीतर भी टिकट बंटवारे को लेकर असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं। लंबे समय से पार्टी में काम कर रहे कार्यकर्ताओं और हाल ही में अन्य दलों से आए नेताओं के बीच खींचतान चुनावी समीकरणों को और रोचक बना सकती है।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि भिवंडी की सियासत किस करवट बैठती है और जनता किसे अपना समर्थन देती है।

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