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SULEMAN USMAN Mithaiwala कैसे बना इतना बड़ा Brand | Exclusive Interview

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हेलो फ्रेंड्स मैं फिरोज मेमन द वॉइस में आप सभी का स्वागत है आज हमारे स्टूडियो में बहुत ही खास मेहमान आए हैं मैं आपको बता दूं के हम टाइम टू टाइम हमारे व्यूवर्स के लिए कुछ ऐसी चीजें लाते हैं जो कि लोगों को भिवंडी शहर में क्या हो रहा है साथ ही साथ में भिवंडी में क्या अपडेट से कुछ एक नया बिजनेस मॉडल इस तरह से हम लोग आपके सामने लाते आज हमारे साथ में एक बहुत ही खास मेहमान है जो कि मुंबई शहर में बॉम्बे के पहले बम्बे कहा जाता था तो बम्बे में 1927 से जो है उनका वर्चस्व कायम है और आज भी उनका वर्चस्व कायम है तो हमारे साथ में

अ बॉम्बे के मशहूर सुलेमान उस्मान मिठाई वाला उनके पोते अ जुबेर भाई हमारे साथ में जुबेर सुलेमान उस्मान मिठाई वाले के नाम से जो कि जाने जाते हैं जुबेर मिठाई वाला तो हम इनसे बात करेंगे और बात करने का हमारा मकसद यह है कि हाल ही में इन्होंने भिवंडी शहर के अंदर एक अपना आउटलेट स्टार्ट किया है अब्दुल गफूर सुलेमान उस्मान मिठाई वाले के नाम से और यह जो है काफी चर्चा में है बम्बे से लेके भिवंडी तक और भिवंडी से लेकर दिल्ली तक इनकी चर्चा है और मैं आपको बता दूं कि इनके कई इंटरनेशनल अवार्ड्स इनके नाम पे है तो यह सारी बातें आज हम यहां पे करेंगे कि किस तरह से इन्होंने ब्रांड को डेवलप किया है क्या नए-नए अ मिठाइयां इनके पास में है क्या नए-नए इनोवेशन इनके पास में है और किस तरह के इनको अवार्ड्स मिले हैं तो यह सारी बातें करेंगे आज हम जुबेर भाई से तो जुबेर भाई आपका बहुत-बहुत स्वागत है हमारे चैनल में

तो शुरू से शुरू करते हैं सुपर भाई थोड़ा सा ये बताइए कि आपकी जो लीगेसी है यह सुलेमान उस्मान मिठाई वाला तो ये कब से है और किस तरह से थोड़ा सा इसका हम एक थोड़ी सी छोटी सी हिस्ट्री जानना चाहेंगे

ये जो लेगासी है ये हमारे दादा अब्बा जो है सुलेमान उस्मान जी ये हम लोग एक्चुअली रहने वाले रेसिडेंशियल पुना के हैं और हमारे दादा जो है वो 1907 और 1910 के अंदर बम्बे आए हुए थे एंड ही स्टार्टेड वर्किंग इन सुलेमान उस्मान जो बेकरी है आज वहां पर ही यूज टू वर्क ओके हम लोग पुना के इनामदार लोग हैं वेल नोन लोग हैं वहां के और दादा अब्बा वहां पर आके बम्बे से मतलब पुना से वहां आए और उनको कुछ करना था ही वांट टू डू समथिंग तो उन्होंने आके कारोबार को सपोर्ट किया वहां मेहनत की कुछ आने के ऊपर काम करते थे वहां पर और बेकरी के ऊपर फिर बाद में पहले वो बेकरी कुछ बेकरी वगैरह कुछ हुआ करती थी अा उसके बाद हमारे दादा ने उसको परचेस किया 1917 और 1918 में समर और उसके बाद जो फर्स्ट आउटलेट सुलेमान उस्मान मिठाई वाला जो है फर्स्ट आउटलेट जो हमारे दादा ने 1925 26 के अंदर मीनार मस्जिद के नीचे ओपन किया

अच्छा 1927 में वो एक्सपेंड होते गया और थ्री आउटलेट उधर ही हो गया फ उसको सिंगल आउटलेट कर दिया दादा अब्बा ने अच्छा फिर उसके बाद दादा ने जो मेहनत की है तो हम यह सोच रहे हैं हमारा यह मानना है कि उसको आगे ले जाना स आई डोंट वांट टू स्टे इन मुंबई अच्छा गेटिंग इट ओवर देयर फिर दादा बा के इंतकाल के बाद बिफोर इंतकाल एक शॉप माहि में खोड़ा था 1964 में उस्मान सुलेमान जहां मेरे डैडी बैठा करते थे

अच्छा और फिर डैडी के इंतकाल के बाद में उन्होंने वो सब चीज हैंडल वगैरह किया फिर डैडी के इंतकाल के बाद में हमारी आई तो हमारा टर्न आया एक्चुअली

जी तो हम लोगों ने उसको वर्क आउट करने की कोशिश किया लेकिन फैमिली डिस्प्यूट की वजह से हम लोग अच्छा जी एक छोटा सा मैं आपको पूछूंगा कि जैसे कि हम लोग बम्बे में आते तो वहां पे सुलेमान उस्मान मिठाई वाला रहता है और जैसे कि हमने भिवंडी में देखा तो यहां पे फ्रॉम द ग्रैंड सन ऑफ अब्दुल गफूर सुलेमान उस्मान मिठाई वाला तो ये थोड़ा सा जो चेंजेज है तो वो मैं जानना चाहूंगा कि ये क्या है ये चेंजेज इसीलिए है कि हमारे फैमिली डिस्प्यूट है आपस में वो शॉप को लेके जी तो वो ऐसा है कि वो सुलेमान उस्मान की जो हमारे जो चाचा है बड़े वो नहीं चाहते हैं कि उस नाम से कोई दुकान खुले

अच्छा अच्छा जी और मैं ये चाहता हूं कि मैं उस नाम के साथ में मेरे वालिद के नाम को पब्लिक को भूलना नहीं जी अब्दुल गफूर सुलेमान उस्मान का बेटा है हम उनकी औलाद है थर्ड जनरेशन वी आर इनटू दिस बनेस वी आर कंटिन्यूइंग द लेगासी जी जी सो मैं चाहता हूं कि पब्लिक इस नाम को नहीं भूले तो ये हिसाब से मैंने एक डिकेड हो गया ऑलमोस्ट आउटलेट को वर्क आउट करते करते तो मैंने इसको कैरी ऑन किया है जी

थोड़ा सा यहां प मैं पूछना चाहूंगा कि जैसे के हमने कई बार देखा है कि सुलेमान मिठाई वाला जो है तो यह आपका जो अब्दुल गफूर कहेंगे तो इसमें ना बहुत ड्रस्ट जो एक्सपेंशन हम कहेंगे तो बहुत ज्यादा जो हम लोगों ने देखा कि बहुत स्पीड ग्रोथ है तो थोड़ा सा बताइए कि इसकी एक्सपेंशन के क्या आपके मतलब क्या एक्सपर्टीज है जो आपने इतना जल्दी इतना एक्सपें किया उसको ब्रांड को देखिए ऐसा है कि सुलेमान उस्मान अफलातून के लिए जाना जाता है जी जो हमारे दादा ने इंट्रोड्यूस किया बम्बे को अफलातून और ड्राई फ्रूट की मिठाई जो है वो सुलेमान उस्मान ने इंट्रोड्यूस की उसके लिए हम लोग जाने ही जाते

मैंने इसके अंदर जो इनोवेटिव याया वो न्यू स्वीट्स लाया जैसा मैंगो विथ चीज हो गया एलोवेरा हो गया ब्लैक पेपर चिल्ली की बर्फी हो गई ब्लैक पेपर चिल्ली जी वो ब्लैक पेपर चिल्ली जिसके लिए हम लोग एक्सक्लूसिव अवार्ड उसी के लिए जीती है एशिया ट्रेड फेयर के अंदर

अच्छा तो वो जो बर्फी है मलाई की उसके अंदर कैसा आए कि पब्लिक आज के जनरेशन को कुछ नया चाहिए दे डोंट नीड दैट हां हां घी वाला स्टफ एंड ऑल करेक्ट करेक्ट तो ये थोड़ा सा हाइजीन टाइप भी है थोड़ा सा कॉन्शियस भी है हेल्थ कॉन्शियस भी है अब मेरे पास इसमें प्रोटीन बर्फी भी अवेलेबल है ओ

तो कैसा है कि मैंने ज्यादातर जो चीज चल रही है वो चल रही है मैंने न्यू इनोवेशन के ऊपर मिठाई के ऊपर ध्यान दिया जो बम्बे की शॉप पे आपको नहीं मिलेगी अच्छा मेन रोड प हमारी सुलेमान मिठाई वाला है बड़े चाचा की शॉप है उसपे भी आपको नहीं मिलेगी माही में उस्मान सुलेमान है वहां पर भी नहीं मिलेगी हमारे जितने फैमिली के आउटलेट है ये सब आपको प्रोडक्ट वहां नहीं मिलेगा ये आपका खुद क मेरा खुद का इनोवेशन है ये आपको सिर्फ अब्दुल गफूर सुलेमान उस्मान में ही मिलेगा

यहां पर भिवंडी में दिल्ली में सॉरी दिल्ली में नहीं भिवंडी में बेंगलोर में जी पुणा में और बर दुबई मीना बाजार में अच्छा ये सब जगह पर आपको एक ही जैसा प्रोडक्ट और ये स्वीट्स वेरिएंट्स आपको मिलेंगे सबज मतलब ये बोलना गलत नहीं होगा कि ये इंटरनेशनल ब्रांड हो गया आपका जी बिल्कुल इंटरनेशन मैं एक्चुअली इसको इस तरीके से चाह रहा था बहुत टाइम से काफी वालिद साहब के इंतकाल के बाद से थोड़ा सा हर्ट भी हुआ था फैमिली के इश्यूज को लेके और मेरा यह मानना था कि नहीं यार इसको अपुन एक नेक्स्ट स्टेज पर ले जाएंगे क्योंकि मैं नहीं चाहता हूं कि मैं दूसरे फैमिली मेंबर्स केसा एक ही जगह प रहूं जी तो मेरा यह मानना था और मेरे रब और मेरे सरकार की दुआ ने ये काम कर दिया कि मैं इसको नेक्स्ट स्टेज प ले आया हूं और मेरे को इसको आगे ही ले जाना है

अच्छा तो मतलब आपके मुंह से गलती से दिल्ली निकल गया था तो क्या अभी आपका अगला ये दिल्ली में है क्या आउटलेट की तैयारी है दिल्ली में ऐसा नहीं कि नहीं है काफी तैयारियां है एक दो आउटलेट की नहीं काफी आउटलेट की तैयारिया है तो मैं सिर्फ रमजान के लिए रुका हूं मैं चाहता हूं पहले भिवंडी का फुलफिल कर दूं हा सब चीज यहां पर उसके बाद नेक्स्ट स्टेप

अच्छा पहले एक सवाल और लेते हैं फिर भिवंडी पे आते हैं कि आपने जैसे बात कि अभी जिक्र किया अवार्ड की तो हम और हमारी ऑडियंस जानना चाहेंगे कि किस तरह के अवार्ड जैसे कि मिठाइयों में भी अवार्ड होते हैं क्या सबसे पहली बात तो ये है कि हां कि मिठाइयों की फील्ड में जो है स्वीट्स की फील्ड में जैसे अवार्ड होते हैं क्या और अगर होते तो आपको कौन-कौन से मिले और कैसे थोड़ा सा इसके बारे में हम जानना चाहेंगे

पहले तो होते सर एग्जिबिशन जी तो हम क्या करते हैं पहले मेरा ये सब चीज में नॉलेज नहीं था जब मैं ये फील्ड में आई वाज वेरी स्मल व्हेन आई केम टू दिस फीड तो मैं जब आया और जब मैंने पर्सनली इसको करने लगा तो मेरे को समझ में आया कि इसमें एक आपको बहुत वेरिएंट्स है आप इसमें कहीं पर भी जंप कर सकते हो जी और क्योंकि अपना इंडियन मार्केट ऐसा है के हम इंडिया के लिए स्टैंड करते तो हमको इंडिया के लिए कुछ करना चाहिए

बिल्कुल तो जो फर्स्ट कफ परेड वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पे एशिया ट्रेड फेयर का अवार्ड लगा हुआ था एशिया ट्रेड फेयर एग्जिबिशन लगा हुआ था तो मैंने उसमें इस शॉप को अपने ब्रांड को फर्स्ट इंट्रोड्यूस किया 201415 में अच्छा तो उसके अंदर मेरी तीन चार मिठाइयां नॉमिनेट हुई फिर वो मेरे को खड़े रह के खुद ही बनाना पड़ा शेफ बनके मेरे को ब बताना पड़ा कि यार मेरे को खुद को आता है आई नो इट करेक्ट तो उसके बाद मेरे को इसका एक स्कोप मिल गया कि नहीं यार फॉर इंडिया वी कैन स्टैंड फॉर इंडिया हम कुछ कर स रिप्रेजेंट द इंडिया फील्ड ऑफ स् इन द फील्ड ऑफ स्वीट्स

तो मैंने उस तरीके से इसको देख के जहां जहां मेरे को मौका मिलता गया आई हैव स्प्रेड माय हैंड्स टू इट टू अचीव दैट और फर्स्ट अवार्ड जो है वो मैंने 201415 में एशिया ट्रेड फेयर अवार्ड लिया दैट आल्सो फॉर मैंगो विथ चीज एंड ब्लैक पेपर चिली

अच्छा उसको अवर्ड मिला उसको अवार्ड मिला और 20123 में आई गट द बेस्ट प्रोपराइटर अवार्ड इ इंडियन आइकन अवार्ड्स अच्छा तो उसके लिए मेरा ऐसा मानना था कि यार मेरा इतने आउटलेट है एक इंटरनेशनल आउटलेट है तो इसको लेट प्रेजेंट इट टू द पीपल ऑफ इंडिया दे शुड नो कि हम इंडिया के लिए लड़ रहे हैं हम इंडिया के लिए कर रहे हैं और हमारी ब्रांड को इंडिया के साथ में जुड़ना चाहिए क्योंकि हम इंडियन है

हां हां डेफिनेटली डेफिनेटली तो और लास्ट अभी जो लेटेस्ट अवार्ड मिला 27th ऑफ जनवरी 2024 ये भी इंटरनेशनल प्राइड अवार्ड है इंटरनेशनल स्कोप के अंदर गया हुआ था मेरी दुबई की आउटलेट से इन लोगों ने कुछ परचेज चेस किया देन प्रॉपर राइटर कौन है क्या है ये लोग ने सब सर्च ऑन करने के बाद मे मेरे को एक इन्विटेशन आया देन आई मूव्ड ऑन टू कपरेट फॉर गेटिंग द अवार्ड

अच्छा तो मैंने जाके फिर उसको रिसीव किया चलो सारे अवार्ड्स के लिए आपको कांग्रेचुलेशन और अब हम ये जानना चाहेंगे कि अवार्ड्स तो देखो जहां क्वालिटी होती है वहीं पे रिवार्ड्स एंड रिकॉग्निशन मिलता है तो अब मैं हम ये चाहते हैं कि भिवंडी के लिए आपने क्या स्पेशल लेके आया है

भिवंडी के लिए मैंने सबसे अहम चीज ये लाया हूं कि पहले तो इस ब्रांड को भिवंडी में इंट्रोड्यूस किया पब्लिक को मैं चाहता हूं कि आप बहुत सारी मिठाइयां खाते हो पूरे बंबई से भिवंडी की पब्लिक मिठाई खाती है हर आदमी हर जगह की मिठाई खाता है जी मेरा हां ये ब्रांड को लाने का मकसद यह है कि क्वालिटी देखिए और भिवंडी की पब्लिक के लिए खास तौर पर यह है कि आप लोग इसको ट्राई करें

आज आप मेरे को बहुत अच्छा फीडबैक मिल रहा है यहां पर मैं बहुत हैप्पी हूं इस शॉप को खोलने के बाद भिवंडी की पब्लिक से मेरा जो कांसेप्ट था जो वे ऑफ थिंकिंग था भिवंडी के लिए वो पूरा चेंज हो गया ड्रस्ट चेंज यू कैन सेट

अच्छा मतलब वो मेरा जो एक्सपेक्टेशन के अबोव थाय अच्छा मतलब आप कुछ और सोच के आए थे ऐसा है और सोच के आया था लेकिन अब मेरे को ये समझ में आया कि नहीं यहां पर पब्लिक खाने वाली है अच्छा दे आर नॉट लुकिंग फॉर द मनी दे आर लुकिंग फॉर द क्वालिटी

तो यहां पर मैंने कोई भी चीज के साथ कभी कंप्रोमाइज नहीं किया और आने वाले वक्त में भी नहीं करूंगा हां भिवंडी की पब्लिक के लिए एक चीज खास है कि आप मेरी दुकान प जाके मैंगो विथ चीज जरूर ट्राई करें

अच्छा ये जो है 48 आवर्स में एक्सपायर हो जाता है प्रोडक्ट फ्रेश अमूल की चीज से बनता है लेकिन ये प्रोडक्ट दूसरी मिठाई वाले नहीं बनाते और इसमें आपको चीज का जायका भी मिलेगा और स्पेशली बच्चों को ध्यान रख के बनाते हैं विदाउट कलर बनाते इसको

अच्छा ये प्योर मैंगो पल्प से बनता है इसमें कलर वगैरह नहीं रहता है एक मलाई दूधी हलवा है वो भी फ्रेश बनता है दूध से बनता है मलाई से बनता है तो भिवंडी की पब्लिक के लिए तो ऐसा बोलने के लिए तो बहुत सारी चीजें हैं

लेकिन मेरा खास स्कोप अब तो भिवंडी की पब्लिक के लिए ये हो गया है कि नहीं यार यू शुड कम और मैं ये चाहता हूं कि मेरी दुकान पे जो पब्लिक आवे ना चाहे वो बाय करे या ना ना बाय करे हां बट दे शुड टेस्ट अच्छा टेस्ट करके तो ये सबको पूरी भिवंडी की जनता को इनवाइट कर रहे हैं कि एक बार आके इनकी दुकान पे टेस्ट करो

और क्या टेस्ट करो खास करके मैंगो मैंगो विथ चीज बर्फी और मलाई दूधी का हलवा अच्छा तो य ये जरूर टेस्ट करना तो यह तो बात हो गई समझो भिवंडी के आउटलेट की लेकिन हमने देखा है कि जब हम लोग रमजान में मोहम्मद अली रोड जाते तो काफी रौनक रहती है और खास करके आपकी दुकान के बाहर जो रौनक रहती है तो वैसी रौनक यहां पर भिवंडी के अंदर देखने मिलेगी इंशाल्लाह

य रमजान में आप लोग को भिवंडी में उससे बेहतर रौनक मिलेगी अगर पब्लिक का सपोर्ट रहा जी और पब्लिक को हमारी क्वालिटी वहां से बेटर लगी मेरे दादा की दुकान से जी तो इंशाल्लाह ल फाइंड द बेस्ट मोर एंड मोर कर् ओवर देयर और रौनक भी इंशाल्लाह य विल गेट मोर मोर ओवर हियर

अच्छा और यहां पर जो माल प आप लोग को मिलेगा वो देसी घी में मिलेगा अरे वाह वाह वाह ये जो खास बात है इस ब्रांड की मेरे ब्रांड की जो खास बात है ये यहां से चारों पांचों आउटलेट में मैं हर जगह मालपुआ देसी घी में ही बनाता हूं

अच्छा क्योंकि मेरा ये मानना है कि कस्टमर का जो सेटिस्फैक्ट्रिली भिवंडी की पब्लिक के लिए एकदम सरप्राइजिंगली वेट कर रहा है बहुत रमजान में आप लोग को एक नया प्रोडक्ट में सुना देता हूं निजाम की नजाकत है अरे वाह ये आपको कोई आउटलेट प नहीं मिलेगा य सिर्फ मेरी आउटलेट प मिलेगा

फिर आपको मैंगो फ्रेश क्रीम की मिठाई मिल जाएगी आपको ओरियो बिस्किट की बर्फी मिल जाएगी ओरियो बिस्किट फिर आपको ब्राउनी की बर्फी मिल जाएगी ये सब रमजान का स्पेशल आइटम है

अच्छा ये सिर्फ आपको रमजान के महीने में मि अच्छा निजाम की नजाकत थोड़ा सा थोड़ा सा निजाम की नजाकत जो है इसके लिए मैं द फ सप्लाई किया करता था

अच्छा मेरा उनसे कॉलेशन था मैंने जाके पर्सनली हैदराबाद में सीख है तो वहां पर मेरा एक दोस्त है वो ही वास शेफ ओवर देर तो उन्होंने मेरे को सिखाया और मैंने उनसे पूछा भी कि यार इफ आई सेल यू डोंट हैव एनी इश्यूज तो उन्होंने कहा नहीं मेरे को कोई इशू नहीं है

अच्छा तो मैं उनका नाम भी रिकमेंड करना चाहूंगा मतलब सिग्नेचर प्रोडक्ट हैय ऐ सिग्नेचर प्रोडक्ट है तो उनका नाम है निजामुद्दीन और मैंने उनसे सीख के उनसे एडवाइस लेके अपनी दुकान पर बेचा क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि किसी का नाम ना आए

मैं चाता हूं मैंने उनसे सीखा हूं उनका नाम बिल्कुल आना चाहिए भले मेरे ब्रांड के नीचे बता इसीलिए निजाम की नजाकत है क्याम की ा अच्छा अच्छा बहुत बढ़िया बहुत बढ़िया उसमें कैसा है कि रबड़ी है बूंदी है गुलाब जामुन है और ड्राई फ्रूट्स अंदर वो एक्चुअली सब मिक्स होता है और उसके बाद बेक होता है

इट इज जस्ट लाइक पुडिंग अरे वाह व्हेन यू ईट इट आप 100 ग्राम खाओगे ना तब नेक्स्ट 100 ग्रा ल अच्छा खुद ही आप खाओगे क्या बात है वो प्योर रबड़ी में बनती है तो ये एक नया प्रोडक्ट है भिवंडी वालो मतलब भिवंडी में नया है बाकी मेरे आउटलेट में तो है ही सब

अच्छा तो ये ये तो हो गई भिवंडी की बातें और अब हम चाहेंगे कि थोड़ा सा आप हमारी भिवंडी की आवाम के लिए जैसे कि आपने बताया के है तो एक आखिरी अपील क्या करना चाहेंगे

आखिरी अपील भिवंडी के आवाम के लिए यह करना चाहूंगा कि आप लोग सब बहुत अच्छे और मतलब आप अच्छा सोच के नहीं आए थे ऐसा कि आने के बाद में मैं नहीं ऐसा नहीं है मैं अच्छा सोच के आया था लेकिन मेरा जो वे ऑफ थिंकिंग था कि यहां पर पब्लिक रहती है

बिकॉज आई एम स्टेइंग इन मुंबई माहीम एक परसेप्शन होता है आदमी का य प अलग रती है अपने जा देखना है लोकैलिटी कैसी है क्या है मेरे को लोगों ने बोला कि यार भाई वो ब्रंड आपका बहुत हाई है सुलेमान उस्मान से बड़ा हो गया है आप इंटरनेशनल ब्रांड हो गए हो आपका मोटिव अलग वहां नहीं चलेगा

लेकिन मैंने इस बात को देखा कि यार नहीं मेरा मोटिव यहां पर वर्क किया क्योंकि यहां पर पब्लिक जो है ना पब्लिक ने मेरे को सपोर्ट किया जी और मैं ये चाहूंगा कि यहां की जो पब्लिक है उनके लिए खास यह बोलूंगा कि यू आर द बेस्ट बॉस जी

जी मैं आपको एक और थोड़ा सा ऐड कर दूं कि भिवंडी की पब्लिक टेस्ट को बहुत अच्छे से जानती है और यहां प क्वालिटी के इसीलिए हमारे यहां के जो ढाबे है वो काफी फेमस है और सिर्फ भिवंडी में नहीं वो पूरे इंडिया में फेमस है

ढाबे इसीलिए क्योंकि यहां की पब्लिक को टेस्ट पता है कि टेस्ट क्या है और क्वालिटी टेस्ट क्या होता है इसके लिए तो यहां पे इंशाल्लाह आपने अगर क्वालिटी बरकरार रखी तो डेफिनेटली आपको जो है सपोर्ट मिलता रहेगा हमारी

इंशाल्लाह आज 204 है जी अगर मैं यहां जिंदा रहा जी और यह मेरा आउटलेट रहा यहां पर तो जब तक मैं हूं जब तक आप लोगों को क्वालिटी में कोई मिस्टेक नहीं मिलेगी

आज मेरे आउटलेट को खुल के इतना टाइम हो गया है लेकिन मेरे को अभी तलग के खाली खुशी ही मिल रही है क्योंकि मेरे को कस्टमर का फीडबैक अच्छा मिल रहा है जी और मैं इससे सेटिस्फाइड हूं मैंने अपने क्वालिटी में कोई गिरावट नहीं की बल्कि मैं चाहता हूं भिवंडी की पब्लिक के लिए एक चीज ये बोल दूं कि

रमजान में आपको फ्लैट 20 पर ऑफ अरे वाह क्या बात है फ्लैट ऑन ईच एंड एवरीथिंग जी जी रमजान के अंदर फ्लैट 20 पर ऑफ आप आओ पैसे को मत देख के आओ आप आओ जी और माल और प्रोडक्ट खाओ बहुत अच्छी बात है बहुत अच्छी बात है ये अभी से दर्ज हो गया है

हां रमजान के लिए ठीक ठीक ठीक तो दोस्तों ये थे हमारे साथ में अ जुबेर मिठाई वाला जो कि सुलेमान उस्मान की लेगासी फॉलो करते हैं और भिवंडी में भी इनका एक आउटलेट है

आउटलेट का मैं एड्रेस बता दूं आपको कि वंजर पटी नाके पे अगर आप जाओगे तो श्रीदेवी ज्वेलर्स के पहले जीएसटी क्लासेस है उसके नीचे इनका आउटलेट है तो आप जरूर जाइए वंजर प नाके पे तो आपको बाहर ही रौनक दिख जाएगी और एक बार इनकी मिठाइयां टेस्ट कीजिए

मैं फिरोज मेहमान द वॉइस से थैंक यू

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Dhaaba Business Module || Nawab Dhaba कैसे बना भिवंडी का सबसे Popular ढाबा

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इस एपिसोड में होस्ट फिरोज मेहमान ने भिवंडी के मशहूर नवाब ढाबा के फाउंडर एहतेशाम भाई से बातचीत की। बातचीत का मकसद था एक ढाबे के बिजनेस मॉडल को समझना—शुरुआत से लेकर सफलता तक।

एहतेशाम भाई ने बताया कि वे साल 2016 में सऊदी अरब से भारत लौटे थे। शुरुआत में उनका सपना कंस्ट्रक्शन बिजनेस करने का था, लेकिन मार्केट सर्वे और अनुभव के बाद उन्होंने महसूस किया कि भिवंडी में टेक्सटाइल और ढाबा बिजनेस सबसे ज्यादा संभावनाओं वाला है। बिना किसी फैमिली बैकग्राउंड या पहले के अनुभव के, सिर्फ आत्मविश्वास और मेहनत के दम पर उन्होंने ढाबा बिजनेस शुरू करने का फैसला लिया।

उन्होंने ढाबा शुरू करते समय आने वाली चुनौतियों, जैसे:

  • सही लोकेशन चुनना (हाईवे और कश्मीरा एरिया का सर्वे)
  • जमीन और एग्रीमेंट से जुड़ी दिक्कतें
  • बिना इंजीनियर के स्टेप-बाय-स्टेप कंस्ट्रक्शन
  • किचन प्लानिंग, ओपन ढाबा कॉन्सेप्ट, गार्डन, फाउंटेन और दास्तरखान जैसी यूनिक थीम

इन सभी पर विस्तार से बात की।

ऑपरेशन और मैनेजमेंट पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि:

  • सही स्टाफ चुनना और उनकी ताकत पहचानना बेहद जरूरी है
  • किचन मैनेजमेंट सबसे बड़ा चैलेंज होता है
  • पार्टनरशिप में डिसीजन मेकिंग एक हाथ में होनी चाहिए
  • कस्टमर एक्सपीरियंस और संतुष्टि बिजनेस की असली चाबी है

नए बिजनेस शुरू करने वालों के लिए उन्होंने तीन अहम बातें बताईं:

  1. सही और पर्याप्त इन्वेस्टमेंट
  2. कस्टमर पर पूरा फोकस
  3. एक बार डिसीजन लेने के बाद पूरी ईमानदारी और मेहनत से उसे लागू करना

एहतेशाम भाई का मानना है कि कोई भी बिजनेस छोटा नहीं होता, अगर उसे सही सोच, क्वालिटी, सफाई, सजावट और मेहनत के साथ चलाया जाए तो सफलता जरूर मिलती है।

इस एपिसोड से नए और मौजूदा बिजनेस ओनर्स को ढाबा बिजनेस और कस्टमर-फोकस्ड अप्रोच की गहरी सीख मिलती है।

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Podcast With Shril Madan | Business Opportunities | Insurance kya hota hai | Kyu Claims Reject hote hai

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हेलो फ्रेंड्स, मैं फिरोज मेहमन The Voice News में आप सभी का स्वागत करता हूं। हाजिर हैं हम एक बार फिर आपके सामने लेकर हमारा एक बहुत ही अनोखा शो Business & Beyond। इस Business & Beyond पॉडकास्ट में हम बात करते हैं नए बिजनेस को लेकर और ऐसे ही आज हम आपके सामने एक नया बिजनेस लेकर आए हैं – इंश्योरेंस।

इंश्योरेंस बहुत से लोगों को समझ में नहीं आता कि आखिर इंश्योरेंस होता क्या है, इसमें कैसे पैसे आते हैं, कैसे डालना है और अगर उसके ऊपर किसी को क्लेम आता है तो कैसे क्लेम करना है और इंश्योरेंस कितने प्रकार के होते हैं। ऐसे ही हमारे साथ आज हैं इंश्योरेंस एक्सपर्ट श्रील मदन जो हमें बताएंगे कि इंश्योरेंस क्या है, इंश्योरेंस कब लेना चाहिए और इसके क्या-क्या फायदे हैं।

तो श्रील मदन जी आपका बहुत-बहुत स्वागत है हमारे चैनल में और आप पहली बार हमारे चैनल पर आए हैं, आपका विशेष स्वागत है। तो थोड़ा सा हम आपसे जानना चाहेंगे इंश्योरेंस के बारे में और इसके अंदर बिजनेस अपॉर्चुनिटीज क्या हैं।

श्रील मदन बताते हैं कि इंश्योरेंस बहुत पुराना है और बीसी 2000 से पहले से ही मौजूद है। शुरुआती समय में लोग अपने माल का इंश्योरेंस करवाते थे ताकि आने-जाने में नुकसान न हो। बाद में 17वीं और 18वीं सदी में मॉडर्न इंश्योरेंस शुरू हुआ, जिसका पहला उदाहरण लंदन के Lloyd’s of London से मिला। 1812 में अमेरिका में पहली इंश्योरेंस कंपनी आई और वहां से यह बाकी देशों में फैला।

भारत में इंश्योरेंस 1818 में शुरू हुआ जब ओरिएंटल लाइफ इंश्योरेंस कंपनी आई। इसके बाद 1918 में इंश्योरेंस एक्ट बना और 1938 में लाइफ इंश्योरेंस एक्ट आया। 1956 में सभी लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों को मिलाकर LIC of India बनाई गई। 1972 में जनरल इंश्योरेंस कंपनियों का राष्ट्रीयकरण हुआ। 1990 के बाद लिबरलाइजेशन आया और IRDA बनाई गई। 2000 में पहली प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनी HDFC Standard Life शुरू हुई।

आज 2025 में भारत में 24 लाइफ इंश्योरेंस कंपनियां, 34 जनरल इंश्योरेंस कंपनियां और 5 हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां हैं। इंश्योरेंस मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है – लाइफ इंश्योरेंस, जनरल इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस। लाइफ इंश्योरेंस जीवन और रिटायरमेंट को कवर करता है। जनरल इंश्योरेंस में गाड़ी, घर, सामान, कंपनी और प्रोफेशनल रिस्क कवर होते हैं। हेल्थ इंश्योरेंस इलाज और मेडिकल खर्चों के लिए होता है।

हर चीज का इंश्योरेंस संभव है – मौत, एक्सीडेंट, डिसेबिलिटी, हाथ-पैर, आवाज और प्रोफेशन तक। लेकिन जानकारी की कमी के कारण लोग अंडर-इंश्योर्ड रहते हैं। लोगों को लगता है कि वे कभी बीमार नहीं पड़ेंगे या उनके पैसे बेकार जाएंगे, जबकि इंश्योरेंस का सिद्धांत “Sharing of Loss” पर आधारित है, जिसमें सभी लोग प्रीमियम भरते हैं और जरूरत पड़ने पर किसी एक को मदद मिलती है।

लाइफ इंश्योरेंस में दो तरह के क्लेम होते हैं – तीन साल के अंदर होने वाला अर्ली क्लेम और तीन साल के बाद होने वाला नॉन अर्ली क्लेम। अगर सही डिस्क्लोजर दिया गया हो तो क्लेम मिलने में कोई दिक्कत नहीं होती। गलत जानकारी देने या बीमारी छुपाने की वजह से ही क्लेम रिजेक्ट होते हैं।

मेडिक्लेम में भी कई बार गलतफहमी होती है। रूम कैटेगरी, नॉन-मेडिकल खर्च और खाने के खर्च की वजह से कुछ कटौती होती है, लेकिन आमतौर पर 95 से 97 प्रतिशत तक क्लेम मिल जाता है। आज हेल्थ इंश्योरेंस काफी कस्टमर-फ्रेंडली हो चुका है और हार्ट अटैक, एंजियोप्लास्टी, डिलीवरी, IVF और डेंटल ट्रीटमेंट तक कवर होने लगे हैं।

सही पॉलिसी लेने के लिए एक भरोसेमंद इंश्योरेंस कंसलटेंट का होना जरूरी है। ऑनलाइन खरीदारी में फ्रॉड की संभावना रहती है, जबकि कंसलटेंट आपको सही जानकारी देता है और क्लेम के समय भी मदद करता है।

इंश्योरेंस एक बड़ा करियर और बिजनेस अपॉर्चुनिटी है। भारत में लाइफ इंश्योरेंस सिर्फ 40 प्रतिशत और हेल्थ इंश्योरेंस करीब 10 से 12 प्रतिशत लोगों तक ही पहुंच पाया है, जबकि विकसित देशों में यह 90 प्रतिशत से ज्यादा है। इसका मतलब भारत में इंश्योरेंस सेक्टर में अभी बहुत बड़ा स्कोप है।

हर घर में लाइफ इंश्योरेंस, हेल्थ इंश्योरेंस और पर्सनल एक्सीडेंट कवर होना चाहिए क्योंकि जिंदगी कब और कैसे बदल जाए, कोई नहीं जानता।

तो दोस्तों, अगर आपको इंश्योरेंस या फाइनेंशियल सेक्टर में इंटरेस्ट है तो आप जरूर कंसल्ट करें। इनकी सारी डिटेल्स स्क्रीन पर दी गई हैं। अगर आपके पास भी कोई बिजनेस आइडिया या बिजनेस अपॉर्चुनिटी है तो उसे Business & Beyond में हमारे साथ शेयर करें।

वीडियो आपको कैसा लगा, कमेंट में जरूर बताइए। इंश्योरेंस से जुड़ी कोई भी क्वेरी हो तो कमेंट में पूछिए, उसका जवाब दिया जाएगा।

श्रील मदन जी, आपसे मिलकर बहुत अच्छा लगा और आपने जो नॉलेज हमारे व्यूअर्स के साथ शेयर की उसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।

फिरोज भाई, हमें मौका देने के लिए आपका भी बहुत-बहुत धन्यवाद।

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भिवंडी शहर की एक लड़की हालत से लढकर बनी CA | Inspirational Story of Insha Tufail Ansari

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भिवंडी जैसे एक छोटे से शहर में रहकर सीए चार्टर्ड अकाउंटेंट का एग्जाम क्लियर किया है। हिजाब में रहकर इतनी बड़ी अचीवमेंट ये अपने आप में एक बहुत बड़ा हम कहेंगे अचीवमेंट है।

यह दुख, यह दर्द, यह सब तेरे अंदर है। तू अपने बनाए हुए पिंजरे से बाहर निकल कर देख। तू अपने आप में एक सिकंदर है।

कि अल्लाह की रज़ रजा के आगे बिल्कुल राजी अल्लाह की रजा के साथ में राजी ये सभी लड़कियों के लिए एक बहुत मोटिवेटेड लाइन है। क्यों? क्योंकि लड़कियां अक्सर जो है शिकायतें करने लग जाती है।

अपने घर में पढ़ा पढ़ना और फिर शादी करके जाना और तुमको वही इमीडिएटली जो है पढ़ाई को कंटिन्यू करना था। तो पूरा जैसे कि ऊपर नीचे हो जाता है। मतलब जैसे कि पूरी दुनिया बदली हो जाती है ना? बदल जाती है पूरी।

जी बिल्कुल।

तो फिर वहां पे जैसे यहां पे मां का लाड था। अब यहां पे सास के ताने हो गए। तो उसमें कैसे तुमने जो है उसको कोप अप किया। कैसे मतलब फिर ये सब चीजें आई थी क्या यहां पर भी।

आप अमिताभ बच्चन के घर में पैदा हो सकते हैं लेकिन अमिताभ बच्चन बनने के लिए आपको कीमत देनी होगी।

क्या बात है दोस्तों तो अब हमें पता चला कि इंशा के इतने सारे अटेम्प्ट क्यों हुए? क्योंकि आधे से आधे से ज्यादा ध्यान तो उनका शायरी याद करने में [हंसी] जाता था।

तो ये बताओ कि जैसे जो स्ट्रगलिंग फेस था जैसे तुमने देखा तुम्हारी इंगेजमेंट टूट गई थी। बार-बार अटेम्प्ट क्लियर नहीं होना तो लोगों की बातें लोगों के ताने रहते थे। तो उससे कैसे तुमने डील किया। कैसे उसे ओवरकम किया।

तो मैं 8 मंथ्स प्रेग्नेंट थी।

ओह हो।

लेकिन फिर भी मैंने हार नहीं मानी। मैंने प्रिपेयर किया एग्जाम के लिए। बहुत ऊपर नीचे मेरी हेल्थ सिचुएशंस भी चल रही थी। बट डिस्पाइट एवरीथिंग मैंने सब कुछ फेस किया। मैंने पढ़ाई की।

हैप्पी शॉप। [संगीत] यह सिर्फ एक दुकान ही नहीं ठिकाना है खुशियों का। शॉप में एंटर करते ही बच्चों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है।
जो लोग इंपॉर्टेंट प्रोडक्ट्स के शौकीन हैं, उन्हें तो यह जगह जिसे जन्नत लगती है।

यहां के प्रोडक्ट क्वालिटी के तो क्या ही कहने। दुनिया भर के बेस्ट ब्रांड्स के प्रोडक्ट आपको यहां मिल जाएंगे।

आप भी अपनी फैमिली के साथ खुशियां बटोरने जरूर आइए। हैप्पी शो। [संगीत] एट सुप्रीम पेट्रोल पंप चाविंद्रा भिवंडी।

हेलो फ्रेंड्स, मैं फिरोज मेमन द में आप सभी का स्वागत है। हमारी सोसाइटी हमारी समाज में औरतों को लेकर काफी लोगों की अलग-अलग सोच अलग-अलग बातें हैं। लेकिन औरतें हर मुकाम पर हर कदम पर अपने आप को साबित कर रही है। अपने को प्रूव कर रही है।

भिवंडीज जैसे एक छोटे से शहर में अपने आपको हाइली एजुकेट करना ये अपने आप में एक बहुत बड़ी बात है। ये अपने आप में एक बहुत बड़ी मिसाल है।

तो ऐसी ही एक खातून, एक मोहतरमा, एक फीमेल, एक लेडीज आज हमारे स्टूडियो में मौजूद है। जिनका नाम है इंशा तफैल अंसारी।

इन्होंने भिवंडी जैसे एक छोटे से शहर में रहकर सीए चार्टर्ड अकाउंटेंट का एग्जाम क्लियर किया है। हिजाब में रहकर इतनी बड़ी अचीवमेंट ये अपने आप में एक बहुत बड़ा हम कहेंगे अचीवमेंट है।

तो ये आज हमारे साथ में हमारे स्टूडियो में है। तो इनकी जर्नी के बारे में, इनके सफर के बारे में, इनके अचीवमेंट के बारे में आज हम बात करेंगे।

तो इंशा बहुत-बहुत स्वागत है आपका हमारे चैनल में।

तो इंशा पहले ये बताइए कि आपने स्कूलिंग कैसे किया और स्कूलिंग के बाद में आपने कैसे किया कि मुझे सीए ही करना है। तो थोड़ा सा उसके बारे में थोड़ा सा बताइए।

स्कूलिंग मैंने डॉ. ओम प्रकाश अग्रवाल इंग्लिश हाई स्कूल से किया है। हम उसके बाद फिर मैंने जूनियर कॉलेज केमएस से किया हुआ है।

तो जब मैं वहां पर थी तो मुझे एक टीचर थी जो कि मुझे हमेशा से देख के बोला करती थी कि इंशा आई सी अ सीए इन यू।

अच्छा।

तो वहां से कहीं ना कहीं एक वो जो सीड होती है।

बीज डाला गया था।

हां वो एक आ गया था। और वहीं से मुझे ऐसा हुआ कि हां मुझे करना है। उस वक्त कुछ पता तो नहीं था कि कैसे करना है, कहां से स्टार्ट करना है, क्या स्टेजेस होते हैं, कुछ भी नहीं था।

लेकिन लकीली उस वक्त कुछ ऐसा हुआ कि ग्रांट आ गई गवर्नमेंट की तरफ से।

और जो फर्स्ट स्टेज होता है वो उसके लिए वो फ्री ऑफ कॉस्ट देने के लिए रेडी। जो फाउंडेशन कोर्स रहता है उसकी बात कर रहे उसके लिए।

और बस उनका एक ही क्राइटेरिया था कि आपको जो आईसीआई को रजिस्ट्रेशन फीस देनी होती है वो आप दे दो। बाकी कोचिंग हम आपको फ्री में दे देंगे।

अच्छा।

तो उस वक्त ऐसा था कि कोई यकीन करने के लिए तैयार भी नहीं था कि ये भिवंडी में रहकर कि ये क्या है। ये कैसे कर कैसे करेगी।

और तो और कुछ इतना ज्यादा था भी नहीं नॉलेज कि कैसे पर्स्यू करना है उस वक्त तो। लेकिन मुझे तो था कि मुझे तो करना ही है। तो मैंने जॉइन कर लिया।

पहले तो थोड़ा सेल्फ डाउट भी हो रहा था कि पता नहीं होगा कि नहीं होगा।

फिर बट मैंने कुछ दिन के लिए मैंने देखा बैठा समझा कि हां डएबल तो है कर सकते हैं। भले ही डिफिकल्ट है लेकिन करेंगे तो हो जाएगा।

तो वहां से मैंने स्टार्ट किया। भले ही मुझे नहीं पता था कि ये जो फाउंडेशन है इसके बाद क्या करना है।

अच्छा।

लेकिन, यह होना चाहिए इंसान के अंदर कि ठीक है जहां तक के रास्ता दिख रहा है, वहां तक के तो चलो।

बिलकुल एक स्टार्ट तो करो। मतलब जैसे इंग्लिश में बोलते हैं ना बिगिनिंग इज हाफ डन। [हंसी]

एक बार तुमने शुरुआत कर दी तो समझो आपका आधा काम हो गया।

हां।

फिर हम वहां पर जब पहुंचते हैं तो हमको आगे का रास्ता भी दिखने लगता है।

तो उस तरीके से फिर मैंने स्टार्ट किया वो जॉइन करके। फिर एक-एक रास्ते खुलते चले गए। पता चलते गया कहां से क्लासेस लेनी है, क्या करनी है।

एंड उस तरीके से फिर मैंने स्टार्ट किया।

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